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पशुपालन विभाग में ठेके के नाम पर इंदौर के कारोबारी से करोड़ों रुपये ठगने के आरोपी आईपीएस अरविंद सेन को भगोड़ा घोषित करने के लिए पुलिस ने तैयारी कर ली है। गोमतीनगर की एसीपी श्वेता श्रीवास्तव आज कोर्ट में इस बाबत अर्जी दाखिल करेंगी। आईपीएस पर 25000 रुपये का इनाम घोषित होने के बाद उन्होंने मंगलवार को दिनभर कानून के जानकारों से मश्विरा कर इससे संबंधित कागजात तैयार कराए।

इस बीच फरार आईपीएस का पुलिस को कोई सुराग नहीं मिल सका है। सोमवार को पुलिस अधिकारियों ने उनके परिचितों के जरिए हाजिर होने का संदेश भेजा था जिसका अब तक कोई जवाब नहीं आया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आईपीएस के दिल्ली, अंबेडकरनगर और अयोध्या समेत अन्य ठिकानों पर टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। अगर आईपीएस अरविंद सेन जल्द पुलिस अथवा कोर्ट के समक्ष हाजिर नहीं होते हैं तो उनकी संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई भी की जाएगी।

आईपीएस अरविंद सेन ने हाईकोर्ट में अग्निम जमानत के लिए अर्जी दाखिल की थी जिसे खारिज कर दिया गया। सोमवार को पुलिस आयुक्त डीके ठाकुर ने उन पर 25000 रुपये का इनाम भी घोषित कर दिया। पुलिस सूत्रों का कहना है कि फरार आईपीएस कोर्ट से जमानत लेने के प्रयास में हैं। मालूम हो कि पशुपालन विभाग में ठेका दिलाने के नाम पर इंदौर के कारोबारी मंजीत सिंह भाटिया से 10 करोड़ रुपये ठगने के आरोपी कथित पत्रकार एके राजीव, अनिल राय, आशीष राय के अलावा पशुधन विकास मंत्री के प्रधान निजी सचिव रजनीश दीक्षित, सचिवालय का संविदाकर्मी धीरज कुमार देव, रूपक राय, उमाशंकर तिवारी समेत 11 लोगों के खिलाफ 13 जून को हजरतगंज कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई गई थी।

ठगी के इस मामले में आईपीएस अधिकारी व सीबीसीआईडी के तत्कालीन एसपी अरविंद सेन की भी सक्रिय भूमिका पाई गई थी। उनके बैंक खातों में ठगों ने दो बार में पांच-पांच लाख रुपये जमा कराए थे जिसकी पुलिस की जांच में पुष्टि हो चुकी है।
पशुपालन विभाग में टेंडर दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये के घोटाले के मामले में पचास हजार के इनामी निलंबित सिपाही दिलबहार को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम कोर्ट के विशेष न्यायाधीश संदीप गुप्ता ने 23 दिसंबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। इस मामले में सीबीसीआईडी के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक एवं वर्तमान में फरार निलंबित डीआईजी अरविंद सेन के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी है। मामले की रिपोर्ट इंदौर के व्यापारी एवं मामले के वादी मनजीत सिंह भाटिया उर्फ  रिंकू ने गत 13 जून को हजरतगंज थाने में दर्ज कराई थी।

 सरकारी वकील प्रभा वैश्य ने कहा की विवेचना में यह पाया गया कि आरोपी पत्रकार आशीष राय के कहने पर सिपाही दिलबहार एक साजिश के तहत मंजीत सिंह भाटिया को थाने ले गया, जहां वसूली की बात चलाई। आटा, दाल, गेहूं एवं चीनी की सप्लाई देने के नाम पर वादी से करोड़ों रुपया मांगे गए तथा भ्रष्टाचार करने के आरोपियों को बचाने के लिए तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अरविंद सेन द्वारा 35 लाख रुपया लिया गया । दिलबहार ने मंजीत सिंह भाटिया को थाने में धमकी भी दी।

पशुपालन विभाग में ठेके के नाम पर इंदौर के कारोबारी से करोड़ों रुपये ठगने के आरोपी आईपीएस अरविंद सेन को भगोड़ा घोषित करने के लिए पुलिस ने तैयारी कर ली है। गोमतीनगर की एसीपी श्वेता श्रीवास्तव आज कोर्ट में इस बाबत अर्जी दाखिल करेंगी। आईपीएस पर 25000 रुपये का इनाम घोषित होने के बाद उन्होंने मंगलवार को दिनभर कानून के जानकारों से मश्विरा कर इससे संबंधित कागजात तैयार कराए।

इस बीच फरार आईपीएस का पुलिस को कोई सुराग नहीं मिल सका है। सोमवार को पुलिस अधिकारियों ने उनके परिचितों के जरिए हाजिर होने का संदेश भेजा था जिसका अब तक कोई जवाब नहीं आया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आईपीएस के दिल्ली, अंबेडकरनगर और अयोध्या समेत अन्य ठिकानों पर टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। अगर आईपीएस अरविंद सेन जल्द पुलिस अथवा कोर्ट के समक्ष हाजिर नहीं होते हैं तो उनकी संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई भी की जाएगी।

आईपीएस अरविंद सेन ने हाईकोर्ट में अग्निम जमानत के लिए अर्जी दाखिल की थी जिसे खारिज कर दिया गया। सोमवार को पुलिस आयुक्त डीके ठाकुर ने उन पर 25000 रुपये का इनाम भी घोषित कर दिया। पुलिस सूत्रों का कहना है कि फरार आईपीएस कोर्ट से जमानत लेने के प्रयास में हैं। मालूम हो कि पशुपालन विभाग में ठेका दिलाने के नाम पर इंदौर के कारोबारी मंजीत सिंह भाटिया से 10 करोड़ रुपये ठगने के आरोपी कथित पत्रकार एके राजीव, अनिल राय, आशीष राय के अलावा पशुधन विकास मंत्री के प्रधान निजी सचिव रजनीश दीक्षित, सचिवालय का संविदाकर्मी धीरज कुमार देव, रूपक राय, उमाशंकर तिवारी समेत 11 लोगों के खिलाफ 13 जून को हजरतगंज कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई गई थी।

ठगी के इस मामले में आईपीएस अधिकारी व सीबीसीआईडी के तत्कालीन एसपी अरविंद सेन की भी सक्रिय भूमिका पाई गई थी। उनके बैंक खातों में ठगों ने दो बार में पांच-पांच लाख रुपये जमा कराए थे जिसकी पुलिस की जांच में पुष्टि हो चुकी है।


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टेंडर दिलाने के नाम पर करोड़ों के घोटाले में निलंबित सिपाही दिलबहार भेजा गया जेल

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