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वाराणसी5 घंटे पहले

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वक्फ बोर्ड चाहता है कि यह मामला वक्फ ट्रिब्यूनल लखनऊ में चलाया जाए ना कि सिविल जज सीनियर कोर्ट की अदालत में, आज की बहस के बाद जिला जज ने इस संबंध में अपना आदेश सुरक्षित कर लिया है।

  • 1991 से न्यायालय में चल रहा मामला
  • एएसआई से खुदाई पर बोर्ड से मांगी आपत्ति

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर और उसी परिक्षेत्र में स्थित ज्ञानवापी मस्जिद मामले में सोमवार को जिला न्यायाधीश की अदालत में हुई सुनवाई के बाद अगली तारीख 3 अक्टूबर तय की गई है। इस दौरान सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड के उस सिविल रिवीजन को विश्वनाथ मंदिर की ओर से चुनौती देते हुए बहस की गई, जिसमें मुस्लिम पक्षकारों ने सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत को मामले की सुनवाई का क्षेत्राधिकार के प्रश्न पर आदेश को चुनौती दी थी।

1991 से चल रहा मामला

काशी विश्वनाथ के अधिवक्ता व वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने बताया कि इस पूरे मामले में वादी के तौर पर स्वयंभू भगवान विश्वेश्वर काशी विश्वनाथ और प्रतिवादी प्रथम पक्ष अंजुमन इंतजामियां व द्वितीय पक्ष सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड लखनऊ है। सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड मामले की सुनवाई लखनऊ में चाहता है। विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी के पुरातात्विक सर्वेक्षण को लेकर मुकदमा 1991 से स्थानीय अदालत मे चल रहा है। इसमें कहा गया है कि मस्जिद, ज्योतिर्लिंग विश्वेश्वर मंदिर का एक अंश है। जहां हिंदू आस्थावानों को पूजा-पाठ, दर्शन और मरम्मत का अधिकार है। कोर्ट से ये मांग स्वयंभू ज्योतिर्लिंग विश्वेश्वर के पक्षकार पंडित सोमनाथ व्यास ने किया था।

मुकदमा दाखिल करने वाले दो वादियों डॉ. रामरंग शर्मा और पंडित सोमनाथ व्यास की मौत हो चुकी है। इसके बाद वादी पंडित सोमनाथ व्यास की जगह पर प्रतिनिधित्व कर रहे वाद मित्र पूर्व जिला शासकीय अधिवक्ता (सिविल) विजय शंकर रस्तोगी ने प्रार्थनापत्र में कहा है कि कथित विवादित परिसर में स्वयंभू विश्वेश्वरनाथ का शिवलिंग आज भी स्थापित है। यह देश के बारह ज्योतिर्लिंग में से एक है। बाद में मंदिर परिसर में मस्जिद बना दिया।

परिसर की खुदाई पर आपत्ति मांगी

विजय शंकर रस्तोगी ने बताया कि कोर्ट से भौतिक और पुरातात्विक दृष्टि से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा सर्वेक्षण तथा परिसर की खोदाई कराकर रिपोर्ट मंगाने की भी अपील पहले की गयी है। जिसपर कोर्ट ने विपक्षियों से आपत्ति भी मांगी है।

वक्फ बोर्ड ने 18 सितंबर को वाद दाखिल किया था

सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने भी जिला जज की अदालत में अट्ठारह सितंबर को वाद दाखिल किया था। जिस पर आज विश्वनाथ मंदिर पक्ष की ओर से वकीलों ने जिला जज की अदालत में आपत्ति की। वक्फ बोर्ड चाहता है कि यह मामला वक्फ ट्रिब्यूनल लखनऊ में चलाया जाए ना कि सिविल जज सीनियर कोर्ट की अदालत में, आज की बहस के बाद जिला जज ने इस संबंध में अपना आदेश सुरक्षित कर लिया है। सुनवाई की अगली तारीख 3 अक्टूबर को नियत की गई है। सुन्नी बोर्ड पुरातात्विक सर्वेक्षण का पक्षधर नहीं है।

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