भारत की फार्मा इंडस्ट्री (Pharma Industry of India) दुनिया में अग्रणी है तो इसके पीछे यही वजह नहीं है कि दवा उत्पादन ज़्यादा होता है बल्कि इलाज संबंधी उपकरणों (Medical Devices) का​ निर्माण भी भारत के फार्मा उद्योग की जान है. टीके और इंजेक्शन देने के लिए ज़रूरी उपकरण सीरिंज का सबसे बड़ा उत्पादन दुनिया में जो कंपनियां करती हैं, उनमें एक भारत की है, जो ​इन दिनों Covid-19 टीकाकरण कार्यक्रम (Vaccination Drive) की कामयाबी के लिए अपनी क्षमता से बढ़कर काम कर रही है. सिर्फ देश ही नहीं, दुनिया की ज़रूरत के लिए आपूर्ति करने में जुटी है.

भारत में सीरिंज की सबसे ​बड़ी निर्माता कंपनी हिंदुस्तान सीरिंज एवं मेडिकल डिवाइसेज़ (HMD) इन दिनों बेहद व्यस्त है क्योंकि दुनिया भर के लिए सीरिंज की डिमांड पूरी करना उसने अपना लक्ष्य बना लिया है. लेकिन, यह संभव नहीं है. कंपनी के प्रमुख राजीव नाथ का कहना है कि वो रोज़ाना करीब 40 ऐसे ईमेल या प्रस्ताव ठुकरा रहे हैं, जिनमें उनसे सीरिंज सप्लाई किए जाने की गुज़ारिश की जा रही है.

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अरबों सीरिंजों की है ज़रूरतभारत की यह कंपनी एक दिन में करीब 40 लाख सीरिंज का उत्पादन कर रही है लेकिन नाथ के हवाले से एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इतना उत्पादन काफी नहीं है क्योंकि दुनिया भर में सिर्फ 60 फीसदी आबादी को वैक्सीन दिए जाने के लिए ही 10 अरब सीरिंजों की ज़रूरत पेश आने वाली है. अस्ल में, यह कंपनी इसलिए चर्चा में आ गई है क्योंकि दुनिया भर में वैक्सीन इंजेक्ट किए जाने के कार्यक्रम के गति पकड़ते ही सीरिंजों की कमी समस्या बनती दिख रही है.

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एचएमडी इस साल सीरिंजों की अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ा रही है.

इससे पहले, सितंबर 2020 में यह कंपनी तब चर्चा में आई थी, जब यूनिसेफ ने इस कंपनी से 14 करोड़ सीरिंज एडवांस बुक करवाई थीं. अब वैक्सीनेशन शुरू होने के बाद सीरिंज बनाने वाली बड़ी कंपनियों की तरफ तमाम देश देख रहे हैं. चूंकि HMD इस सेक्टर की एक बड़ी कंपनी है इसलिए इससे उम्मीदें बढ़ी हैं. इसके अलावा, विश्व स्वास्थ्य संगठन और संयुक्त राष्ट्र के साथ करार होने से भी ग्लोबल सप्लाई के लिए यह कंपनी अहम हो गई है.

इस साल बनाई जाएंगी 2.7 अरब सीरिंज
नाथ की मानें तो उनकी कंपनी हर साल करीब 2.5 अरब सीरिंजों का उत्पादन करती है, लेकिन टीकाकरण कार्यक्रम के दौरान बढ़ी हुइ मांग के मुताबिक कंपनी ने अपनी क्षमता बढ़ाकर 2.7 अरब सीरिंज तक उत्पादन करने की ठानी है. कंपनी ने इस बड़े लक्ष्य के लिए 500 से 1000 ज़्यादा लोगों को हायर किया है और उन्हें ट्रेनिंग देकर उत्पादन के काम में जोड़ा है. हालांकि कंपनी का दावा है कि क्वालिटी से कोई समझौता नहीं किया जा रहा है.

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नाथ का कहना है कि दुनिया भर में सरकारों को डर है कि कहीं सीरिंज की शॉर्टेज न हो जाए इसलिए सभी इसका भंडार रखना चाहते हैं. अमेरिका, यूके, इटली, जर्मनी जैसे देशों से कई क्लाइंट उनकी कंपनी से रोज़ाना सीरिंज की डिमांड कर रहे हैं, लेकिन नाथ अपनी मजबूरी बताकर उन्हें इनकार कर रहे हैं.

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सीरिंज निर्माता कंपनी एचएमडी के एमडी राजीव नाथ

70% सीरिंज भारत के लिए, बाकी…
कंपनी की पूरी उत्पादन क्षमता जितनी है, उसके हिसाब से कंपनी सितंबर तक किसी नई डिमांड को डील नहीं कर सकती. नाथ के मुताबिक उनकी कंपनी अपना 70 फीसदी उत्पादन भारत को सप्लाई करने के लिए कर रही है, वहीं 30 फीसदी उत्पादन को ग्लोबल मार्केट को सप्लाई किया जा रहा है. बताया गया है कि यूएन के सहयोग कार्यक्रम ‘कोवैक्स’ के तहत भी यह कंपनी सीरिंज मुहैया करवा रही है.

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नाथ का कहना है कि बेहतर क्षमता के साथ उत्पादन के लिए सबसे ज़रूरी बात है कि उत्पादकों, सरकारों के बीच बेहतर समन्वय हो और इसके बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसी संस्थाओं की भूमिका भी बेहतर हो, लेकिन फिलहाल यह चुनौती दिख रहा है. फिर भी नाथ को उम्मीद है कि यह सामंजस्य ठीक से होगा और मेहनत रंग लाएगी.

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