अमेरिका के नए राष्ट्रपति (US President) जो बाइडन के कार्यकाल में महिलाओं को भारी प्रतिनिधित्व मिलने का सिलसिला (Women in Team Biden) बदस्तूर जारी है. इसी हफ्ते बाइडेन ने घोषणा की कि अमेरिका की मिलिट्री कमांड्स (Military Commands) के प्रमुख के तौर पर दो महिलाओं का नाम सीनेट की मंज़ूरी के लिए भेजा गया. अगर मंज़ूरी मिलती है तो दोनों दूसरी और तीसरी महिलाएं बनेंगी जो अमेरिकी सेना (US Military) में इतने बड़े पद तक पहुंचेंगी. इनसे पहले सिर्फ लोरी रॉबिनसन (Lori Robinson) ने यह कीर्तिमान रचा था, जब वह 2018 में रिटायर होने से पहले नॉर्दर्न कमांड की प्रमुख थीं.

अमेरिकी मिलिट्री में सबसे बड़ी रैंक चार स्टार जनरल की है, जिसे वायुसेना की जनरल जैकलीन ओवोस्ट (Jacqueline Van Ovost) हासिल कर यहां तक पहुंचने वाली पहली महिला बन चुकी हैं. जैकलीन का नाम ट्रांसपोर्टेशन कमांड (USTRANSCOM) प्रमुख के तौर पर बढ़ाया गया है. इसी तरह, तीन स्टार जनरल लॉरा रिचर्डसन (Laura Richardson) का नाम दक्षिण कमांड (SOUTHCOM) को लीड करने के लिए.

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क्यों खास हैं जैकलीन और लॉरा?इन दोनों ही महिला अफसरों के नॉमिनेशन को लेकर ट्रंप के रोड़े की बात आगे बताएंगे. पहले जानते हैं कि जैकलीन और लॉरा कौन हैं. मिलिट्री की वर्दी में सबसे बड़ी रैंक तक पहुंचने वाली जैकलीन अमेरिका के इलिनॉइस में 1965 में जन्मी थीं. 1988 में एयर फोर्स एकेडमी से ग्रैजुएशन के बाद उन्होंने वायु सेना जॉइन की थी.

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2020 में जैकलीन रक्षा विभाग में इकलौती चार स्टार महिला जनरल बनीं और अमेरिकी वायु सेना के इतिहास में ऐसी पांचवी महिला. अमेरिका में इस बात की काफी चर्चा रहती है कि जैकलीन शादीशुदा हैं या नहीं क्योंकि वह अपनी निजी ज़िंदगी को काफी गोपनीय रखती हैं. हाल में कुछ खबरों में बताया गया कि उनके पति का नाम एलन फ्रॉश है, जो एयर फोर्स की ब्रीफिंग में दिखे हैं, लेकिन वो एयर फोर्स में ही हैं या नहीं, यह पुष्टि नहीं है.

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पेंटागन ने महिला जनरलों के नाम 2020 में ही तय कर लिये थे.

दूसरी तरफ, लॉरा की निजी ज़िंदगी इसलिए ज़ाहिर है क्योंकि उनके पति जेम्स रिचर्डसन भी अमेरिकी मिलिट्री में जनरल की रैंक के अफसर हैं. इराक युद्ध के समय यह कपल अमेरिकी मीडिया में काफी चर्चित था, जिसे टाइम मैगज़ीन ने कवर पर छापा भी था और लिखा था कि ‘नए शादीशुदा और पैरेंट बने मियां बीवी अपनी बटालियन लेकर जंग लड़ने गए’.

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इससे पहले 16 साल की उम्र में पायलट लाइसेंस हासिल करने वाली लॉरा 1986 में आर्मी में शामिल हुई थीं. बेहतरीन करियर के बाद 2011 में उन्हें पहली बार ब्रिगेडियर जनरल रैंक पर प्रमोट किया गया था. आर्मी की सबसे बड़ी यानी करीब 8 लाख सोल्जरों वाली फोर्सेस कमांड का नेतृत्व कर लॉरा कर चुकी हैं, जिन्हें अब सदर्न कमांड के लिए चुना जा रहा है.

क्यों ट्रंप के ​समय में अटका था नॉमिनेशन?
खबरों की मानें तो 5 मार्च को लॉरा और जैकलीन का नाम सीनेट को भेजा गया. इससे पहले पिछले महीने एनवायटी ने एक रिपोर्ट में बताया था कि अमेरिकी रक्षा विभाग यानी पेंटागन ने पिछले साल ही इन दोनों का नाम तय कर लिया था, लेकिन नॉमिनेशन भेजने में देर होती रही.

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लॉरा और जैकलीन के नामों का ऐलान करने में देर होने का कारण पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का डर रहा. रिपोर्ट की मानें तो अमेरिका के पूर्व डिफेंस सचिव मार्क एस्पर को डर था कि ट्रंप लॉरा और जैकलीन के नाम पर मंज़ूरी नहीं देंगे क्योंकि वो दोनों महिलाएं हैं. एस्पर मानते थे कि महिलाओं को इतने अहम पद दिए जाने पर ट्रंप सहमत नहीं हो सकते थे.





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