दंपति का कहना है कि महंगाई में सिलेंडर भरवाना उनके बस की बात नहीं है. घर चलाएं या गैस भरवाएं. सिलेंडर भरवाएं तो चूल्हा काम में आए. गैस के चूल्हे पर खाना बनाते हैं तो अच्छा रहता है. लकड़ी वाले चूल्हे पर धुंआ लगता है. पैसे नहीं आए इसलिए सिलेंडर नहीं भरवाया. राज्य के दूसरे छोर पर महाराष्ट्र से लगा आदिवासी बहुल बालाघाट, यहां भी शारदा, मुन्नीबाई जैसी महिलाओं को चूल्हे पर लौटना पड़ा है. शारदा साफ कहती हैं पैसा नहीं है, इसलिए गैस नहीं भरवाई. वहीं मुन्नीबाई वंशकार का कहना है हमारे पास पैसे नहीं है, कैसे भरवाएंगे, 800 रुपये गैस हो गई है.

उज्जवला के कई हितग्राही तो चूल्हे पर लौट आए हैं लेकिन चाय की दुकान चलाने वाले अनिल जैन या अनीता श्रीवास्तव जैसी गृहणियों के पास तो विकल्प भी नहीं है. अनिल कहते हैं गैस के दाम बढ़ने से बहुत नुकसान हो रहा है. लागत ज्यादा आ रही है, मुनाफा कम हो रहा है. अनीता श्रीवास्तव का कहना है गैस के दाम निरंतर बढ़ते ही जा रहे हैं. इससे बहुत प्रभाव पड़ रहा है. पहले 450 रुपये था, अब 800 रुपये. बेहद परेशानी हो रही है घर चलाने में, पूरी व्यवस्था बिगड़ती जा रही है.

हालांकि सरकार को राजेश या मुन्नीबाई के घर को नहीं देखना, वो चाहती है योजना के विज्ञापन को भी मीडिया दिखाए. कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग उज्जवला के सिलेंडर के सवाल पर प्रधानमंत्री की तारीफ करते हुए कहने लगे कि पहली बार कोई प्रधानमंत्री ऐसे आए हैं, जिन्होंने उन मांओं की फिक्र की, जिनकी आंखें खराब हो जाती थीं लकड़ी के चूल्हे से, जिनको सांस की बीमारी हो जाती थी. जब हमने पूछा वो इश्तेहार तो पुराना हो गया, कहां बंट रहे हैं अब सिलेंडर तो उन्होंने कहा कि कहां से इश्तेहार हो गया, जिनको मिला है, आप उनकी बात नहीं कर रहे हैं. जब हमने कहा कि हम आदिवासी बहुल जिलों की बात कर रहे हैं, तो उनका जवाब था कि आप क्या मालूम कहां से देखकर आए हैं. 1-2 कहां के फुटेज, जो आपके पास हैं, उसके बारे में वह नहीं बोल सकते लेकिन हमारी सरकार ने रसोई से धुंआ हटाने के लिए काम किया है.

महंगाई की मार : दो महीनों में LPG के दामों में 125 रुपये का इजाफा, पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी

जब हमने उनसे कहा कि शहडोल जैसे जिलों में एक आंकड़ा है कि लगभग 85 फीसदी लाभार्थी चूल्हे पर लौट आए हैं तो उनका कहना था पता नहीं क्यों ऐसे आंकड़े आपके पास ही आते हैं. कांग्रेस इस मुद्दे पर सरकार को घेर रही है. कांग्रेस के पूर्व कैबिनेट मंत्री जयवर्धन सिंह ने कहा सब कह रहे हैं कि 7 साल पहले मोदी जी कहते थे कि जीडीपी बढ़ेगी. अब सब कह रहे हैं कि इस जीडीपी का मतलब गैस, पेट्रोल, डीजल है क्योंकि उसकी ही कीमत बढ़ी है. आम उपभोक्ता पर दबाव बढ़ रहा है. स्पष्ट हो रहा है कि मध्य प्रदेश में महंगाई बढ़ती जा रही है. बताते चलें कि प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत ₹1600 की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है. इस राशि से लाभार्थी गैस कनेक्शन ले सकता है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2021–22 के बजट में एक करोड़ और लोगों को एलपीजी गैस कनेक्शन देने की घोषणा की है. अखबारी इश्तेहार है, उसमें सरकार ये तो बताती है कि कितने करोड़ लोगों को उज्जवला का कनेक्शन दिया लेकिन ये छिपाती है कि कितने हितग्राही महंगाई की वजह से चूल्हे के अंधेरे में लौट आए हैं.

VIDEO: रवीश कुमार का प्राइम टाइम : ‘उज्जवला’ से चूल्हे की तरफ लौटे आदिवासी परिवार

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here