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केंद्रीय शहरी विकास राज्यमंत्री हरदीप सिंह पुरी
– फोटो : अमर उजाला

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आगरा में फतेहाबाद रोड पर यूटिलिटी डक्ट, सड़क, डिवाइडर, सीवर, पानी की लाइनों और सीसीटीवी कैमरों के काम में घटिया गुणवत्ता की शिकायतें लगातार उठ रही हैं। स्मार्ट सिटी सलाहकार समिति के सदस्य और जनप्रतिनिधियों ने भी स्मार्ट सिटी के काम पर सवाल खड़े किए हैं। इनके बावजूद मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोमवार को स्मार्ट सिटी की रैंकिंग बेहतर बताकर क्लीन चिट दे दी। 

फतेहाबाद रोड, सर्किट हाउस रोड पर यूटिलिटी डक्ट और फुटपाथ के काम पर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की तकनीकी टीम ने गड़बड़ियां पाईं थीं, लेकिन उन्हें दूर करने की जगह आनन फानन में टाइल्स लगाकर उसके ऊपर फुलवारी लगा दी गई। टीम हर सप्ताह जांच के लिए आती है।

इसी तरह फतेहाबाद रोड पर पुराना डिवाइडर तोड़कर नया डिवाइडर बनाया और उस पर फूलदार पौधे लगाए जो सूख गए। डिवाइडर पर करोड़ों रुपये खर्च हुए अब मेट्रो के लिए वही डिवाइडर तोड़ा जा रहा है। यूटिलिटी डक्ट के घुमावदार होने और फुटपाथ के टाइल्स टूट जाने की शिकायतों को भी कंपनी ने दरकिनार कर दिया।

रावतपाड़ा, फुलट्टी बाजार, सुभाष बाजार की ओर स्मार्ट सिटी के 5 खंभे 11 महीनों में बीच में से टूट चुके हैं। घटिया गुणवत्ता के कारण लकड़ी की तरह बीच से पोल के टूटने पर स्मार्ट सिटी सलाहकार समिति भी सवाल उठा चुकी है। एक दो नहीं, बल्कि शहर में ऐसे 40 से ज्यादा पोल हैं जिनमें बीच में से दरार आ चुकी है। 

लोहामंडी, नामनेर, बेलनगंज, रावतपाड़ा में सीसीटीवी कैमरों के पोल गिरने के कगार पर हैं। स्मार्ट सिटी के अधिकारी घटिया गुणवत्ता की बात मानने को तैयार नहीं। उनका दावा है कि पोल की केमिकल जांच हो चुकी है। वह कमजोर नहीं पाया गया।

जो कमी मिलीं हैं, उनमें सुधार कराया है

आगरा स्मार्ट सिटी लिमिटेड के पीएमसी लीडर आनंद मेनन के मुताबिक एक साल के अंदर 5 पोल टूटने के मामले में कंपनी अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा रही है। हमने एसएसपी से भी मिलकर अज्ञात लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। यह सभी पोल वह हैं, जिन पर सीसीटीवी नहीं लगे थे। 

इसका फायदा उठाकर पोल काटे जा रहे है, जिससे वह बीच से टूट रहे हैं। स्मार्ट सिटी के काम की गुणवत्ता जांच के लिए एएमयू की टीम जांच करती है। हर सप्ताह वह जांच कर बताती है। इसके अलावा चार इंजीनियरों की टीम निर्माण कार्य के लिए है जो गुणवत्ता जांच रही है। जो कमी पाते हैं, उनमें सुधार के बाद ही भुगतान कर रहे हैं। 
आगरा स्मार्ट सिटी सलाहकार समिति के सदस्य दिगंबर सिंह धाकरे ने बताया कि स्मार्ट सिटी के काम की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं, उनकी जांच होनी चाहिए। फतेहाबाद रोड पर जो काम चल रहे हैं, उनसे लोग परेशान हैं। काम करने का तरीका तो खराब है ही, गुणवत्ता उससे भी ज्यादा खराब है। समिति की बैठक महीनों से नहीं हुई। जब काम पूरे कर लेंगे, तब सलाह के लिए बैठक करेंगे क्या। 

लगातार गड़बड़ियां मिलीं

स्मार्ट सिटी सलाहकार समिति के सदस्य पूरन डावर ने बताया कि स्मार्ट सिटी के काम में लगातार गड़बड़ियां हैं। स्मार्ट सिटी का काम स्मार्ट तरीके से ही नहीं हो रहा। फतेहाबाद रोड को नर्क बना दिया है। यूटिलिटी डक्ट हो या रोड, या डिवाइडर, सभी के काम स्मार्ट तरीके से नहीं किए गए। गुणवत्ता भी खराब है।

नहीं हुए धूल नियंत्रण के उपाय

सांसद प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल ने कहा कि स्मार्ट सिटी के फतेहाबाद रोड पर जो काम चल रहे हैं, उनमें धूल नियंत्रण के उपाय हुए ही नहीं। जिस तरह मेट्रो ने बैरिकेडिंग की, क्या उस तरह स्मार्ट सिटी ने काम किया। पूरी रोड पर बेहद खराब तरीके से निर्माण कार्य किया गया है। 

सार

  • आगरा में विकास कार्यों की गुणवत्ता पर लगातार आ रही शिकायतों को दरकिनार कर केंद्रीय शहरी विकास राज्यमंत्री हरदीप सिंह पुरी स्मार्ट सिटी को क्लीन चिट दे गए। 

विस्तार

आगरा में फतेहाबाद रोड पर यूटिलिटी डक्ट, सड़क, डिवाइडर, सीवर, पानी की लाइनों और सीसीटीवी कैमरों के काम में घटिया गुणवत्ता की शिकायतें लगातार उठ रही हैं। स्मार्ट सिटी सलाहकार समिति के सदस्य और जनप्रतिनिधियों ने भी स्मार्ट सिटी के काम पर सवाल खड़े किए हैं। इनके बावजूद मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोमवार को स्मार्ट सिटी की रैंकिंग बेहतर बताकर क्लीन चिट दे दी। 

फतेहाबाद रोड, सर्किट हाउस रोड पर यूटिलिटी डक्ट और फुटपाथ के काम पर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की तकनीकी टीम ने गड़बड़ियां पाईं थीं, लेकिन उन्हें दूर करने की जगह आनन फानन में टाइल्स लगाकर उसके ऊपर फुलवारी लगा दी गई। टीम हर सप्ताह जांच के लिए आती है।

इसी तरह फतेहाबाद रोड पर पुराना डिवाइडर तोड़कर नया डिवाइडर बनाया और उस पर फूलदार पौधे लगाए जो सूख गए। डिवाइडर पर करोड़ों रुपये खर्च हुए अब मेट्रो के लिए वही डिवाइडर तोड़ा जा रहा है। यूटिलिटी डक्ट के घुमावदार होने और फुटपाथ के टाइल्स टूट जाने की शिकायतों को भी कंपनी ने दरकिनार कर दिया।


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40 खंभों में आ चुकी है दरार

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