न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Updated Mon, 25 Jan 2021 12:54 AM IST

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संगम की रेती पर संतों-भक्तों और कल्पवासियों की सेवा कर पुण्य कमाने के लिए सात समंदर पार अमेरिका, इंग्लैंड समेत कई देशों से सेवादार पहुंच गए हैं। वह भारत की अतिथि देवो भव: की परंपरा को आत्मसात करने के साथ ही सनातनी सांस्कृतिक मूल्यों अपना रहे हैं। इसमें विदेशी पुरुषों के साथ महिलाएं भी पूड़ियां परोसकर खुद माघ मेले में सेवा के जरिए खुद को धन्य बना रही हैं। इसी के साथ दो दिन बाद पौष पूर्णिमा से आरंभ होने वाले महीने भर के जप, तप,ध्यान के लिए कल्पवासी पहुंचने लगे हैं। मंगलवार को ट्रैक्टर-ट्रालियों और अन्य वाहनों से पुआल और गृहस्थी के सामानों के साथ सैकड़ों कल्पवासी शिविरों में पहुंचे।

माघ मेले में संतों-भक्तों के सबसे बड़े समागम की अनूठी झलक इन दिनों सेक्टर-दो स्थित ओम वाहेगुरु ऋषि आश्रम के शिविर में देखी जा सकती है। अपर संगम मार्ग पर स्थित इस शिविर के अन्नक्षेत्र में दिन के 11 से शाम छह बजे तक संतों और भक्तों की लंबी कतारें प्रसाद के लिए लग रही हैं। खास बात यह है कि इस अन्नक्षेत्र मे संतों-भक्तों की सेवा करने वाले दो दर्जन से अधिक विदेशी और एनआरआई शामिल हैं। न्यूजीलैंड में अपना एफएम चैनल चलाने वाले माइक्रोनी भी वाहेगुरु के शिविर में संतों की सेवा में जुटे हैं।

वह लॉकडाउन के पहले ही भारत आ गए थे और तब से बाबा के आश्रम में रहकर सेवाभाव सीख रहे थे। अब माघ मेले में आतिथ्य सत्कार के लिए पहुंच गए हैं। इसी तरह अमेरिका में तीन रेस्टोरेंट के मालिक निक्सन भी लंबी कतारों में प्रसाद के लिए लने वाले संतों के लिए थालियां पहुंचाने और पानी परोसने में जुटे रहते हैं। इसी तरह इंग्लैंड से आई क्रिस्टोना भी इस शिविर में पूड़ियां परोस रही हैं। हालांकि सात समंदर पार से आए इन सेवादारों की खास खूबी यह है कि वह अपना नाम तक उजागर नहीं होने देना चाहते। उनका कहना है कि वह नि:स्वार्थ भाव से माघ मेले में महीने भर खामोशी से सेवा कर पुण्य अर्जित करेंगे।
 

  • अमेरिका, इंग्लैंड, आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड से कई सेवादार आए हैं। वह अपना नाम उजागर किए बिना चुपचाप सेवा भाव में लीन हैं। ऐसे विदेशी सेवादार भारतीय संस्कृति और आतिथ्य की परंपरा से प्रभावित हैं। सत्यम बाबा-ओम वाहे गुरु ऋषि आश्रम।

 

दूसरे स्नान पर्व की तैयारी शुरू,कल्पवास 28 से

संगम की रेती पर माघ मेला पौष पूर्णिमा पर 28 जनवरी से आरंभ होगा। इसी के साथ माघ मेले के दूसरे सबसे बड़े स्नान पर्व की तैयारी आरंभ हो गई है। इसके लिए हर सेक्टर में स्नान घाट बनाए जाएंगे। संगम पर एक किमी से लंबा स्नान घाट बनाया गया। जबकि, गंगापार झूंसी की तरफ सबसे बड़ा स्नान घाट बनाया जा रहा है, ताकि कोविड-19 की गाइड लाइन का पालन करते हुए संत-भक्त डुबकी लगा सकें। 

संगम की रेती पर संतों-भक्तों और कल्पवासियों की सेवा कर पुण्य कमाने के लिए सात समंदर पार अमेरिका, इंग्लैंड समेत कई देशों से सेवादार पहुंच गए हैं। वह भारत की अतिथि देवो भव: की परंपरा को आत्मसात करने के साथ ही सनातनी सांस्कृतिक मूल्यों अपना रहे हैं। इसमें विदेशी पुरुषों के साथ महिलाएं भी पूड़ियां परोसकर खुद माघ मेले में सेवा के जरिए खुद को धन्य बना रही हैं। इसी के साथ दो दिन बाद पौष पूर्णिमा से आरंभ होने वाले महीने भर के जप, तप,ध्यान के लिए कल्पवासी पहुंचने लगे हैं। मंगलवार को ट्रैक्टर-ट्रालियों और अन्य वाहनों से पुआल और गृहस्थी के सामानों के साथ सैकड़ों कल्पवासी शिविरों में पहुंचे।

माघ मेले में संतों-भक्तों के सबसे बड़े समागम की अनूठी झलक इन दिनों सेक्टर-दो स्थित ओम वाहेगुरु ऋषि आश्रम के शिविर में देखी जा सकती है। अपर संगम मार्ग पर स्थित इस शिविर के अन्नक्षेत्र में दिन के 11 से शाम छह बजे तक संतों और भक्तों की लंबी कतारें प्रसाद के लिए लग रही हैं। खास बात यह है कि इस अन्नक्षेत्र मे संतों-भक्तों की सेवा करने वाले दो दर्जन से अधिक विदेशी और एनआरआई शामिल हैं। न्यूजीलैंड में अपना एफएम चैनल चलाने वाले माइक्रोनी भी वाहेगुरु के शिविर में संतों की सेवा में जुटे हैं।

वह लॉकडाउन के पहले ही भारत आ गए थे और तब से बाबा के आश्रम में रहकर सेवाभाव सीख रहे थे। अब माघ मेले में आतिथ्य सत्कार के लिए पहुंच गए हैं। इसी तरह अमेरिका में तीन रेस्टोरेंट के मालिक निक्सन भी लंबी कतारों में प्रसाद के लिए लने वाले संतों के लिए थालियां पहुंचाने और पानी परोसने में जुटे रहते हैं। इसी तरह इंग्लैंड से आई क्रिस्टोना भी इस शिविर में पूड़ियां परोस रही हैं। हालांकि सात समंदर पार से आए इन सेवादारों की खास खूबी यह है कि वह अपना नाम तक उजागर नहीं होने देना चाहते। उनका कहना है कि वह नि:स्वार्थ भाव से माघ मेले में महीने भर खामोशी से सेवा कर पुण्य अर्जित करेंगे।

 

  • अमेरिका, इंग्लैंड, आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड से कई सेवादार आए हैं। वह अपना नाम उजागर किए बिना चुपचाप सेवा भाव में लीन हैं। ऐसे विदेशी सेवादार भारतीय संस्कृति और आतिथ्य की परंपरा से प्रभावित हैं। सत्यम बाबा-ओम वाहे गुरु ऋषि आश्रम।

 

दूसरे स्नान पर्व की तैयारी शुरू,कल्पवास 28 से

संगम की रेती पर माघ मेला पौष पूर्णिमा पर 28 जनवरी से आरंभ होगा। इसी के साथ माघ मेले के दूसरे सबसे बड़े स्नान पर्व की तैयारी आरंभ हो गई है। इसके लिए हर सेक्टर में स्नान घाट बनाए जाएंगे। संगम पर एक किमी से लंबा स्नान घाट बनाया गया। जबकि, गंगापार झूंसी की तरफ सबसे बड़ा स्नान घाट बनाया जा रहा है, ताकि कोविड-19 की गाइड लाइन का पालन करते हुए संत-भक्त डुबकी लगा सकें। 



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