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नई दिल्ली8 घंटे पहले

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  • प्रोत्साहन पैकेज के कारण देश में स्टील की खपत बढ़ी
  • डिमांड के मुकाबले देश में स्टील का उत्पादन नहीं

स्टील की कीमतों को लेकर आम आदमी को अभी राहत मिलने वाली नहीं है। इसका कारण यह है कि इसकी डिमांड में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड के एमडी वी आर शर्मा का कहना है कि स्टील की कीमतों में कमी आने में कम से कम 2 साल का वक्त लग सकता है। उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष में देश में स्टील की डिमांड उत्पादन से ज्यादा हो सकती है।

चालू वित्त वर्ष में 150 मिलियन टन की डिमांड की उम्मीद

शर्मा ने कहा कि वित्त वर्ष 2020-21 में देश में स्टील की डिमांड 140-150 मिलियन टन रह सकती है। जबकि उत्पादन 125 मिलियन टन रहने की उम्मीद है। कीमतों में कमी के सवाल पर शर्मा ने कहा कि इसमें 2 साल का वक्त लग सकता है। इसका कारण यह है कि डिमांड लगातार बनी हुई है। अप्रैल से देश में हॉट-रोल्ड कॉइल (HRC) की कीमत 58,000 रुपए प्रति टन पर बनी हुई है। जबकि अंतरराष्ट्रीय स्टील की कीमतें 1 अप्रैल 2021 से 735-740 डॉलर के आसपास चल रही हैं। एक साल पहले की समान अवधि के मुकाबले घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्टील की कीमतें 50% ज्यादा हैं।

वित्तीय पैकेज से बढ़ी खपत

उन्होंने कहा कि भारत समेत अधिकांश देशों ने प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की है। इससे खपत बढ़ गई है। जब तक यह प्रोत्साहन पैकेज इस्तेमाल नहीं हो जाते हैं, तब तक स्टील की कीमतों में कमी नहीं आएगी। शर्मा ने कहा कि कैलेंडर ईयर 2020 में चीन को छोड़कर पूरी दुनिया में स्टील की डिमांड में कमी रही थी। इस वर्ष भारतीय स्टील इंडस्ट्री में 10% की नेगेटिव ग्रोथ रही थी और 99 मिलियन टन स्टील की डिमांड रही है।

पिछले वित्त वर्ष में 4% की गिरावट का अनुमान

वी आर शर्मा ने कहा कि अभी तक पूरे देश का डाटा नहीं आया है। लेकिन मेरा अनुमान है कि 1 अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2021 के दौरान देश की स्टील इंडस्ट्री में 4% की गिरावट हो सकती है। उन्होंने अनुमान जताया कि पिछले वित्त वर्ष में देश में 104 मिलियन टन स्टील की डिमांड रही है, जबकि 112 मिलियन टन की उम्मीद जताई जा रही थी।

चालू वित्त वर्ष में ज्यादा डिमांड रहेगी

उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष 2021-22 में भी स्टील की डिमांड ज्यादा रहेगी। इस साल घरेलू स्तर पर 140-150 मिलियन टन स्टील की डिमांड रहेगी, जबकि उत्पाद 125 मिलियन टन के आसपास रह सकता है। इस साल अब तक का सबसे ज्यादा उत्पादन हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस साल निश्चित तौर पर उत्पादन से ज्यादा डिमांड रहेगी।

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