यूपी पंचायत चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट से यूपी की योगी सरकार को बड़ी राहत म‍िली है

यूपी पंचायत चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट से यूपी की योगी सरकार को बड़ी राहत म‍िली है

सुप्रीम कोर्ट ने 1 अप्रैल से जारी होने वाले चुनावी बॉन्ड्स पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि चुनावी बॉन्ड्स सत्ताधारी दल को चंदे के नाम पर घूस देकर काम कराने का रास्ता बन गया है.

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने 1 अप्रैल से जारी होने वाले चुनावी बॉन्ड्स (Electoral Bonds) पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने कहा है कि यह योजना साल 2018 में लागू हुई है और फिलहाल चल रही है. साथ ही इसकी सुरक्षा के लिए भी सारे उपाय किये गये हैं. इसके साथ ही कोर्ट ने आगामी विधानसभा चुनावों से पहले, चुनावी बॉन्ड की बिक्री पर रोक लगाने का अनुरोध करने वाली याचिका खारिज कर दी.

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग ने कहा कि वह चुनावी बॉन्ड योजना का समर्थन करते हैं क्योंकि अगर ऐसा नहीं होगा तो राजनीतिक दलों को चंदा कैश में मिलेगा. हालांकि आयोग ने कहा कि वह इस प्रक्रिया में पारदर्शिता चाहता है.

ADR ने दी थी याचिका
चुनावी और राजनीतिक सुधारों के क्षेत्र में काम करने वाली एक गैर-सरकारी संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने 1 अप्रैल और 10 अप्रैल के बीच निर्धारित किए गए चुनावी बांड की बिक्री पर अंतरिम रोक लगाने की मांग करते हुए अदालत का रुख किया था.सुप्रीम कोर्ट में एडीआर की ओर से दाखिल याचिका पर वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि चुनावी बॉन्ड्स सत्ताधारी दल को चंदे के नाम पर घूस देकर काम कराने का रास्ता बन गया है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमेशा यह घूस सिर्फ सत्ताधारी दल को ही नहीं मिलता बल्कि उसको भी मिलता है जिसके अगली बार सरकार में आने के आसार ज्यादा रहते हैं.

भूषण ने कहा कि आरबीआई ने भी इस पर आपत्ति जाहिर की है. आरबीआई का कहना है कि यह बॉन्ड्स एक आर्थिक घोटाले का औजार या रास्ता है.





Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here