प्रयागराज15 मिनट पहले

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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar

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प्रयागराज में गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला दिया। हाईकोर्ट ने कहा है कि अब से ज़मीन की अर्ज़ी सीधा हाईकोर्ट मंज़ूर नहीं करेगी। इसके लिए कोर्ट को यह बताना पड़ेगा कि सत्र न्यायालय में अग्रिम ज़मानत की अर्ज़ी क्यों नहीं दी गई। साथ किन परिस्थियों में अग्रिम ज़मान के लिए हाईकोर्ट में याची को आना पड़ा है, उन परिस्थितियों का ज़िक्र भी हाईकोर्ट से करना पड़ेगा।

अग्रिम ज़मानत सीधा हाईकोर्ट मंज़ूर नहीं करेगी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीधे दाखिल अग्रिम जमानत की अर्जी को स्वीकार करने से मना कर दिया और कहा कि जब तक अर्जी में विशेष परिस्थिति का उल्लेख न हो तबतक हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी सीधे प्रथम स्तर पर ग्रहण नहीं की जा सकती है।

विशेष कारणों का उल्लेख करना होगा
कोर्ट ने सीधे हाईकोर्ट में दाखिल अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा कि 5 जजों की वृहदपीठ का फैसला है कि अग्रिम जमानत अर्जी सीधे हाईकोर्ट में दाखिल करने के लिए उन कारणों व विशेष परिस्थितियों का उल्लेख करना होगा कि याची ने अग्रिम जमानत की अर्जी संबंधित सत्र न्यायालय में क्यों नहीं दे सका।

यदि सन्तोषजनक कारणों का ज़िक्र नहीं है तो सीधे हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी मंज़ूर नहीं होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने गाजियाबाद के भोपाल व दो अन्य की तरफ से दाखिल याचिका को खारिज करते हुए पारित किया है।

विशेष परिस्थिति से नहीं संतुष्ट हुई कोर्ट
याचीगण के खिलाफ गाजियाबाद के थाना-साहिबाबाद में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471, 506, 120 बी, 34 व 386 के अन्तर्गत मुकदमा दर्ज है। इस मामले में याचिका दायर कर हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत की मांग की गई थी।

हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि याचीगण ने कहीं भी उन विशेष परिस्थितियों का उल्लेख नहीं किया है कि वे क्यों इसके लिए सत्र न्यायालय नहीं जा सकते अथवा वह कौन सी विशेष परिस्थिति है कि हाईकोर्ट सीधे इस मामले की सुनवाई करे। कोर्ट ने याचिका खारिज कर याचीगण को यह छूट दी है कि वे इसके लिए सत्र न्यायालय में अर्जी दाखिल कर सकते हैं।

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