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लखनऊ3 मिनट पहले

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उत्तर प्रदेश में जिला पंचायत सदस्य की 3050 सीटें हैं। लेकिन वाराणसी में एक प्रत्याशी की मौत के चलते चुनाव स्थगित हो गया था। जबकि एक सीट का परिणाम जारी नहीं हुआ है। - Dainik Bhaskar

उत्तर प्रदेश में जिला पंचायत सदस्य की 3050 सीटें हैं। लेकिन वाराणसी में एक प्रत्याशी की मौत के चलते चुनाव स्थगित हो गया था। जबकि एक सीट का परिणाम जारी नहीं हुआ है।

  • जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में सपा 759, भाजपा 768, बसपा 319 सीटों पर जीतीं
  • कांग्रेस 125, रालोद 69, आप 64 और निर्दलीयों को 944 सीटें मिलीं

उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में 3,050 सीटों पर हुए जिला पंचायत सदस्यों के चुनाव का रिजल्ट तीसरे दिन देर रात आ गया। एक तरफ जहां सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा के सिंबल पर उतारे गए सदस्यों को ज्यादातर जनता ने नकारा तो वहीं सपा ने कोविड-19 के बिगड़े माहौल और भाजपा के विरोध का फायदा उठाते हुए अपने सदस्यों को जिताने में कामयाब रही। खास बात यह रही जीते हुए सदस्यों में सबसे ज्यादा निर्दलीय हैं। अब जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में निर्दलीय पर निर्भर होकर भाजपा और सपा चुनाव मैदान में जंग लड़ेगी।

BJP-SP से ज्यादा निर्दलीय जीते

यूपी के 75 जनपदों की कुल 3050 सीटों पर हुए चुनाव में बीजेपी और सपा से ज्यादा निर्दलीयों ने जीत दर्ज की है। जिला पंचायत सदस्यों के 3047 सीटों में सपा 759, भाजपा 768, बसपा 319, कांग्रेस 125, रालोद 69, आप 64 और निर्दलीयों को 944 सीटें मिली हैं। खास बात यह है कि, निर्दलीय जीते हुए प्रत्याशी सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा से टिकट न मिलने से नाराज होकर चुनाव लड़े थे। ऐसा ही समाजवादी पार्टी के भी कई सदस्यों को पार्टी का सिंबल नहीं मिला था। वह भी नाराज होकर मैदान में उतरे और चुनाव जीतकर पहुंचे हैं।

खास बात यह है कि अब उत्तर प्रदेश के जिला पंचायत अध्यक्षों के चुनाव में निर्दलीयों की भूमिका सबसे अहम रहेगी जो कि तय करेंगे कि अगला जिला पंचायत अध्यक्ष कौन चुना जाएगा?

नफरत की राजनीति जनता को पसंद नहीं

सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम ने कहा, ‘जनता ने पंचायत चुनाव में यह स्पष्ट कर दिया है कि उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियां और व्यवस्था और उसके द्वारा किए गए कार्यों को जनता पसंद नहीं कर रही हैं। इनके द्वारा लोगों को प्रताड़ित किया जा रहा है, वह जनता ने नकार दिया है। नफरत की राजनीति किसी भी कीमत पर जनता पसंद नहीं करती। सौहार्द, प्रेम, सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी की पॉलिटिक्स फेल हो गई है। जिला पंचायत, ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत के परिणाम से यह साबित हो गया है कि भारतीय जनता पार्टी की जुमलेबाजी वादाखिलाफी सब दिखावा है।’

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