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इलाहबाद23 मिनट पहले

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आनंद गिरी को शुक्रवार को निरंज - Dainik Bhaskar

आनंद गिरी को शुक्रवार को निरंज

अखाड़ा पऱिषद और निरंजनी अखाड़े से निष्कासित किए जाने के बाद योग गुरु आनंद गिरी ने कहा कि यदि अभी मैंने मुंह खोला तो मुझे मरवा दिया जाएगा। आनंद गिरी ने अपने गुरू स्वामी नरेंद्र गिरी का नाम तो नहीं लिया पर अपनी जान का खतरा जरूर बताया। कहा-इस मामले में मुझसे कुछ न कहलवाइये, समय आने दीजिए सब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। उन्होंने इस पूरे मामले को उचित फोरम पर चुनौती देने की बात कही है। अखाड़े से निष्कासित किए जाने के बाद योग गुरु आनंद गिरी का कहना है कि जो भी कार्रवाई हुई है वह अन्यायपूर्ण है। मैंने इस अखाड़े को अपना जीवन दिया है और आज मेरे ऊपर अनर्गल आरोप लग रहे हैं। उन्होंने कहा कि उचित समय आने पर सभी आरोपों का जवाब दिया जाएगा। उधर, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि आनंद गिरी के निष्कासन का फैसला केवल मेरा नहीं है। अखाड़े के पंच परमेश्वर ने जांच के बाद जो निर्णय किया है उसके आधार पर निष्कासन की कार्रवाई की गई है। इस मुद्दे पर उन्होंने आगे कुछ भी कहने से इनकार किया है।

मठ-मंदिरों की आय परिवार को देने का आरोप है आनंद गिरी पर
संगम स्थित बड़े हनुमान मंदिर के व्यवस्थापक स्वामी आनंद गिरि को पंचायती अखाड़ा निरंजनी से शुक्रवार को निष्कासित कर दिया गया था। संन्यास धारण करने के बावजूद भी आनंद गिरि की पारिवारिक मायामोह में फंसने की शिकायतें मिली थीं। इसके बाद अखाड़े की पंच परमेश्वर कमेटी ने इसकी जांच की थी। जांच में सभी आरोप सही पाए जाने के बाद अखाड़े की कार्यकारिणी ने हरिद्वार में बैठक कर आनंद गिरि के निष्कासन का निर्णय लिया था।

निरंजनी अखाड़े की ओर से आनंद गिरी को निष्कासन संबंधी जारी पत्र में कहा गया है कि संन्यास धारण करने के बावजूद अपने परिवार से संबंध रखने के कारण उन्हें निष्कासित किया गया है। अखाड़े की इस कार्रवाई के बाद अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने आनंद गिरि को बाघंबरी गद्दी मठ और संगम स्थित बड़े हनुमान मंदिर की व्यवस्थाओं से भी उनको अलग कर दिया है।
पत्र में चढ़ावे पर हाथ साफ करने का था आरोप
स्वामी नरेंद्र गिरी द्वारा निरंजनी अखाड़े को भेजे गए पत्र में संगम किनारे लेटे हनुमान मंदिर में रोज लाखों में आने वाले चढ़ावे पर हाथ साफ करने का जिक्र था। उस पत्र में कहा गया था कि स्वामी आनंद गिरी इस चढ़ावे के धन का दुरुपयोग कर रहे हैं और इस पैसे से अपने परिजनों को लाभ पहुंचा रहे हैं। उनके इस कृत्य की घोर निंदा की गई थी और इसे संत परंपरा के घोर खिलाफ माना गया था।

गुप्तदान में आता है लाखों का चढ़ावा
त्रिवेणी बांध स्थित लेटे हनुमान मंदिर में देश-विदेश से आने वाले भक्त हर साल लाखों रुपये दान में देते हैं। इसमें बड़े पैमाने पर ऐसे लोग शािमल होते हैं जोकि गुप्त दान करते हैं। दान करने वालों में बड़े व्यापारी, अफसर, राजनेता, अभिनेता भी शामिल हैं। मंदिर में रोज हजारों की संख्या में आने वाले भक्त भी दान करते हैं। माघ मेला व कुंभ मेले में भी चढ़ावा बढ़ जाता है। गुप्त दान का कोई हिसाब-किताब नहीं होता। ऐसे में आरोप है कि इसी चढ़ावे से आनंद गिरि अपने परिवार का खजाना भरने में काफी दिनों से लगे हुए थे। हरिद्वार में पंच परमेश्वर की पिछले दिनों हुई बैठक में यह मुद्दा जोर-शोर से उठा था। पंच परमेश्वरों द्वारा की गई आंतरिक जांच में ये आरोप सही पाए गए थे।

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