सुल्तानपुर। जिले में साइबर अपराध बेलगाम हो रहे हैं और साइबर क्राइम थाना कुंभकर्णी नींद में है! एक ऐसा ही मामला सामने आया है जहाँ साइबर ठगी के शिकार व्यापारी को इंसाफ के लिए थाने नहीं, बल्कि अदालत की शरण लेनी पड़ी।

क्या है पूरा मामला?
अखंडनगर थाना क्षेत्र के बेलवाई गांव निवासी संतोष कुमार जायसवाल, जो सृष्टि इंटरप्राइजेज फर्म के प्रोपराइटर हैं, के साथ 17 जुलाई को बड़ा साइबर फ्रॉड हुआ। अज्ञात जालसाजों ने उनका मोबाइल हैक कर उनके करंट अकाउंट से 1 लाख 82 हजार रुपये उड़ा लिए। मोबाइल पर डेबिट का मैसेज आया तो उनके होश उड़ गए, बैंक पहुंचे तो ठगी का पता चला।

1930 पर शिकायत की, SP को चिट्ठी लिखी, फिर भी पुलिस टस से मस नहीं!
पीड़ित ने दूसरे ही दिन 18 जुलाई को साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस लाइन स्थित साइबर थाने में लिखित तहरीर भी दी, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने सिर्फ जांच के नाम पर दौड़ाया। महीनों तक FIR दर्ज नहीं की, न ही पैसा होल्ड कराने की कोशिश की।

थक-हार कर पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक को स्पीड पोस्ट से पत्र भेजा, लेकिन वहां से भी कोई जवाब नहीं आया।

आखिर कोर्ट ने दिलाया न्याय!
जब सारी उम्मीदें टूट गईं तो पीड़ित ने अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कक्ष संख्या-21 की अदालत में गुहार लगाई। कोर्ट के सख्त आदेश के बाद 27 जुलाई को जाकर साइबर थाने में अज्ञात ठगों के खिलाफ FIR दर्ज हो सकी।

बड़ा सवाल – अगर समय पर कार्रवाई होती तो बच जाते 1.82 लाख?
ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि जब साइबर क्राइम तेजी से बढ़ रहा है, तब साइबर थाना ही शिकायतों को नजरअंदाज कर रहा है। अगर पहले दिन ही कार्रवाई होती तो शायद रकम को होल्ड कराया जा सकता था।

अब सवाल ये है कि क्या साइबर थाने में आम आदमी की सुनवाई के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाना ही आखिरी विकल्प बचा है?

रिपोर्ट :-
मोहम्मदऔरंगज़ेब

सुल्तानपुर एक्सप्रेस


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