👉 शासन-प्रशासन की टालमटोल से आक्रोशित आशा कार्यकर्ताओं ने उठाई हुंकार, हाथों में काली पट्टी बांधकर ठप करेंगी कामकाज लखनऊ / सुल्तानपुर: प्रदेशभर की लाखों आशा बहुओं और संगिनियों ने अपनी लंबित न्यायसंगत मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ एक बार फिर आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। राजधानी लखनऊ के इको गार्डन में पूर्व में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करने के बावजूद शासन स्तर पर सुस्ती और मांगों की अनदेखी किए जाने से नाराज ‘आशा हेल्थ वर्कर्स एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश’ ने अब सीधे स्वास्थ्य केंद्रों पर कड़ा रुख अपनाने का निर्णय लिया है। संघ की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती कुसुम लता यादव के नेतृत्व में जारी कड़े आधिकारिक नोटिस के अनुसार, अब प्रदेश की समस्त आशा बहनें और संगिनियां अपने-अपने जनपदों के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) पर अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार करेंगी। ⚠️ क्या रहेगा आंदोलन का स्वरूप? हाथों में काली पट्टी: आंदोलन के दौरान सभी आशा कार्यकर्ता अपने हाथों पर काली पट्टी बांधकर पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से सरकार के प्रति अपना कड़ा विरोध दर्ज कराएंगी। पूर्ण कार्य बहिष्कार: स्वास्थ्य केंद्रों पर किसी भी प्रकार के मैदानी और चिकित्सीय कार्यों का संपादन नहीं किया जाएगा, जिससे स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं पर सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा है। जिलाधिकारी और मिशन निदेशक को भेजा गया नोटिस: एसोसिएशन की ओर से मिशन निदेशक (NHM), प्रमुख सचिव / राज्य प्रतिनिधि तथा संबंधित जनपदों के जिलाधिकारियों (DM) को आधिकारिक रूप से नोटिस भेजकर चेतावनी दे दी गई है। 📌 मुख्य अधिकारियों को भेजी गई है प्रतिलिपि इस आंदोलन की गूंज शासन से लेकर जिला स्तर तक सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित अधिकारियों को प्रतिलिपि भेजी गई है: मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO), समस्त जनपद, उत्तर प्रदेश। समस्त प्रभारी चिकित्सा अधिकारी (CHC/PHC), उत्तर प्रदेश। समस्त जिला इकाई एवं आशा बहुएं / संगिनियां। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन-प्रशासन इस उग्र और व्यापक कार्य बहिष्कार से निपटने के लिए क्या कदम उठाता है और आशा कार्यकर्ताओं की न्यायसंगत मांगों पर कब मुहर लगती है। रिपोट :- शिवकुमार यादव सुल्तानपुर एक्सप्रेस Post navigation सुलतानपुर में फुटपाथ पर अवैध कब्जे का सनसनीखेज आरोप – कुड़वार नाका में भगत हॉस्पिटल घेरे में, SDM सदर की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल!