BREAKING: सुल्तानपुर:जिले के सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की रीढ़ कही जाने वाली आशा बहुओं के साथ जिला अस्पताल में बदसलूकी और तानाशाही का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां महिला लेबर रूम के बाहर तैनात सुरक्षा गार्डों ने न सिर्फ अपनी मर्यादा तार-तार की, बल्कि मरीज की जान बचाने में जुटी आशा बहू से धक्का-मुक्की करते हुए उसका मोबाइल तक छीन लिया। इतना ही नहीं, विरोध करने पर उन्हें जेल भिजवाने तक की धमकी दे डाली। क्या है पूरा मामला?जानकारी के अनुसार, आज सुबह करीब 10 बजे आशा बहू रीता अपने क्षेत्र की एक बेहद गंभीर महिला मरीज सबरीन को लेकर जिला अस्पताल पहुंची थीं। मरीज की हालत बेहद नाजुक थी और उसके शरीर में महज 5 ग्राम खून बचा था। इमरजेंसी की स्थिति को देखते हुए आशा रीता ने मरीज की देखभाल के लिए लेबर रूम के अंदर जाने की कोशिश की और तैनात गार्ड्स से बार-बार गुहार लगाई। लेकिन संवेदनहीन हो चुके गार्ड्स ने उनकी एक न सुनी और अंदर जाने से रोक दिया। बात यहीं खत्म नहीं हुई; गार्ड्स ने आशा बहू के साथ अभद्रता और धक्का-मुक्की करते हुए उसका मोबाइल फोन छीन लिया। साथी आशा सपोर्ट में पहुंचीं तो उनके साथ भी बदसलूकीजब पास मौजूद साथी आशा बहू निर्मला और अन्य स्टाफ ने रीता के साथ हो रही नोकझोंक देखी, तो वे बीच-बचाव करने पहुंचीं। मगर बेखौफ गार्ड्स ने उनके साथ भी बदजुबानी और गाली-गलौज शुरू कर दी। गार्ड्स की इस दबंगई से अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। संगठन अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद वापस मिला मोबाइलघटना के तुरंत बाद पीड़ित आशा बहुओं ने “आशा हेल्थ वर्कर्स एसोसिएशन” की प्रदेश अध्यक्ष “कुसुम लता यादव” को फोन कर आपबीती सुनाई। प्रदेश अध्यक्ष कुसुम लता यादव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला अस्पताल के उच्चाधिकारियों से संपर्क किया और गार्ड्स की करतूत पर कड़ा एतराज जताया। अधिकारियों के दखल के बाद गार्ड्स बैकफुट पर आए और तब जाकर आशा बहू का छीना गया मोबाइल वापस किया गया। बड़ा सवाल: आखिर गार्ड्स क्यों छीनते हैं मोबाइल?इस सनसनीखेज घटना के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं: क्या जिला अस्पताल में हो रही अव्यवस्थाओं या लापरवाही का वीडियो न बने, इसलिए गार्ड्स मोबाइल छीनने पर उतारू रहते हैं? दूर-दराज से गंभीर मरीजों को जान हथेली पर रखकर लाने वाली स्वास्थ्य कर्मियों के साथ बदसलूकी करने की छूट गार्ड्स को किसने दी? बार-बार ऐसी घटनाएं होने के बावजूद इन बेलगाम गार्ड्स और सुरक्षा एजेंसी पर सख्त कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं होती? घटना की जानकारी मिलते ही पूरे जिले के आशा संगठनों में भारी आक्रोश व्याप्त है। आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर अस्पताल प्रशासन ने इस तरह की गुंडई पर सख्त कदम नहीं उठाए, तो वे कार्य बहिष्कार कर सड़क पर उतरने को मजबूर होंगी। आपकी क्या राय है? कमेंट में बताइए – गार्ड पर कार्रवाई होनी चाहिए या नहीं? #SultanpurNews #DistrictHospital #AshaBahu #SultanpurExpress #BreakingNews #UPHealth #AshaWorkers Post navigation कुछ बोलेंगे तो विवाद हो जाएगा…”: बीजेपी उत्तर प्रदेश के सोशल मीडिया पोस्ट पर सियासी घमासान, वायरल तस्वीर पर गरमाई राजनीति