जम्मू और कश्मीर की निचली अदालतों में 3.89 लाख मामले लंबित
कुल पेंडेंसी (लंबित मामले)
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जनवरी 2026 के अंत तक जम्मू-कश्मीर की अधीनस्थ/निचली अदालतों में 3,89,210 मामले लंबित हैं।
आपराधिक बनाम दीवानी
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इनमें से लगभग 2,40,718 (62 %) मामले आपराधिक मुकदमे हैं — यानी अपराध से जुड़े आरोपों वाली सुनवाई लंबित है।
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बची 1,48,492 मामले दीवानी (नागरिक दावे/सिविल) कार्यवाही के हैं।
पुराने मामलों का बोझ
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पेंडेंसी की उम्र का विवरण इस प्रकार है:
• लगभग 2,38,373 मामले 1 साल से कम पुराने हैं — यानी हाल ही में दायर हुए मुकदमे।
• लगभग 36,849 मामले 3-5 साल से पुराने।
• 58,000+ मामले ऐसे हैं जो 5 साल से लेकर 30 साल तक पुरानी तारीख से पेंडिंग हैं।
• 13 मामले 30 साल से भी अधिक समय से लंबित हैं।
जिला स्तर पर स्थिति
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जम्मू जिला में सबसे ज़्यादा मामले पेंडिंग — 77,992 केस।
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इसके बाद श्रीनगर में 62,785 केस लंबित हैं।
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अन्य जिलों में भी बड़ी संख्या में केस लंबित हैं जैसे अनंतनाग, बरामूला, बडगाम इत्यादि।
पेंडेंसी के मुख्य कारण
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नए मुकदमों का लगातार बढ़ना — अदालतें हर साल नई फाइलें भी संभाल रही हैं।
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जजों की संख्या अपेक्षित से कम — वर्तमान में कुछ जजों के पद खाली हैं, जिससे केस निपटने की गति धीमी है।
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पुराने मामलों का बोझ जो वर्षों से निपट नहीं पा रहे।
समाधान के प्रयास
सरकार और न्यायपालिका ने कई कदम उठाए हैं ताकि मामले जल्दी निपटें — जैसे:
कोर्टों का डिजिटलाइजेशन और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल
नए जजों की भर्ती और पदों को भरना
लोक अदालत (Lok Adalat) के माध्यम से समझौता समाधान आदि।

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